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PUBG-बच्चों-युवानो के लिए खतरनाक

 PUBG-बच्चों-युवानो के लिए खतरनाक 

मस्तिष्क और शरीर पर मोबाइल गेम के प्रभाव पर एक संशोधन पत्र प्रकाशित किया गया था. यह संशोधन
संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान द्वारा प्रकाशित किया गया था इसमें यह बताया गया कि मोबाइल गेमिंग, अस्वस्तथा,चिंता अकेलेपन, विगेरे को प्रभावित करता है. इन बातों को समझना मुश्किल नहीं है, अगर आपको थोड़ी भी मेडिकल में दिलचस्पी है तो. यहां तक कि जो लोग मोबाइल के लिए लगातार आदि है, और जब उन्हें फोन चार्जिंग में लगाना पड़ता है, तब वो लोग गेम नहीं खेल पाते हैं, तब उन्हें ऐसा लगता है कि उसके पास से कुछ चला गया है, और उन्हें कई बार लूट लिया गया है. ऐसा वह महेसुस करते हैं. ये शोध पत्र, "द एसोसिएशन बिटवीन मोबाइल गेम्स एंड एडिक्शन एंड मेंटल हेल्थ", के लेखक सभी चीन से थे।

PUBG-बच्चों-युवानो के लिए खतरनाक
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भारत सरकार ने चीनी मोबाइल ऐप ko ben kiyaa


भारत सरकार ने चीनी मोबाइल ऐप जैसी सवा सौ एप्लीकेशन पर प्रतिबंध लगाने का बहुत अच्छा काम किया है. लेकिन उसका मतलब यह नहीं है, कि चीनी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दुनिया भर के शोधकर्ता के साथ मिलकर लोगों को मोबाइल गेम से दूर रहने की चेतावनी दी है. जब हम मोबाइल पर गेम खेल रहे हैं, तो हमें ऐसा लगता है कि हम कोई ओरिजिनल गेम खेल रहे. हैं लेकिन वास्तव में यह गेम हमारे साथ खेल, खेल रहा होता है. और हमको इसके बारे में जरा भी ज्ञान नहीं होता

PUBG-कोरोना के समान है


कुछ हद तक हाला कोरोना के समान है. जैसा कि हर कोई कोरोना संक्रमण के बारे में नहीं जानता है. औसत गेमर इस बात से अनजान है, कि वह खेल संक्रमित हो गया है. और मोबाइल, कंप्यूटर गेम ने इसे ध्यान में रखा है. जब ऐसा होता है तो आपको एक मनोरोग केंद्र में जाना पड़ता है
प्लेयर अननोन बैटलग्राउंड (पब्जी) नामक एक गेम पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गया है. और लोकप्रिय होने के साथ-साथ वो  लोग भी इस गेम के व्यसनी हो गए हैं. इसीलिए पब्जी गेम तंबाकू, बीड़ी, या गुटका की तरह एक व्यसन गेम है. पबजी मोबाइल के अलावा यह प्लेस्टेशन और कंप्यूटर में भी खेला जाता है. तो हो सकता है कि इस गेम पर प्रतिबंध बिल्कुल न लग सके. भारत में पब्जी बैन होने के कारण अब तक इसके 127 मिलियन उपयोगकर्ता फ्री हो गए हैं भारत द्वारा पब्जी प्रतिबंध किए जाने के बाद, पाकिस्तान ने भी इस खेल पर प्रतिबंध लगा दिया है. 
PUBG-बच्चों-युवानो के लिए खतरनाक
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इसके अलावा जॉर्डन, इराक, नेपाल आदि देशों ने पहले से ही इस खेल को समाप्त कर दिया है. भारत सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया है. लेकिन गुजरात सरकार ने तो कुछ क्षेत्रों में पहले से ही इस पर प्रतिबंध लगा दिया है. पब्जी खेल 100 से अधिक देशों में खेला जाता है. यह ध्यान देने योग्य है कि भारत में, दुनिया में मोबाइल पब्जी उपयोगकर्ताओं की संख्या सबसे अधिक थी. लेकिन सबसे ज्यादा मोबाइल गेम खेलने वाले शीर्ष 5 देशों में चीन कहीं नहीं था इसीलिए दुनिया को रोमांचित करने वाला खेल चीन में लोकप्रिय नहीं था.
जून 2019 तक पब्जी गेम दुनिया में 100 मिलियन से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता थे. जिससे यह दुनिया में सबसे लोकप्रिय और आकर्षक गेम बन गया. यह अपने मालिक Tencent के लिए बहुत अधिक इनकम कराने वाला बिजनेस था. और तब भारत द्वारा प्रतिबंध लगाने के ठीक 4 दिन बाद Tencen के शेयरों में तीन मिलियन डॉलर की गिरावट आ गई है. पब्जी के खेल में मारधाड़ के अलावा कुछ भी नहीं था. हम जानते हैं, कि कुछ खेल खेलने से कुछ कौशल्य सीखा जाता है. लेकिन पब्जी खेल में ऐसा बिल्कुल नहीं था. लेकिन पब्जी खेल खेलने वाले को जो याद था वह भी भूल जाने लगे. और कुछ लोग अपना दिमाग का संतुलन भी खो चुके हैं. इसीलिए चीन सरकार ने पब्जी गेम के कुछ हिंसक वर्जन पर अपने ही देश में पूरी तरह से बैन लगा दिए गए हैं.

युवाओं और बच्चों में पब्जी के आकर्षण के बहुत से कारण है. इसमें से कारण यह है कि पब्जी गेम तुरंत संतुष्टि देता है. आज की पीढ़ी को और क्या चाहिए ?? जो तुरंत सब कुछ चाहते हैं. तत्काल संतुष्टि प्राप्त करने से शरीर में कुछ स्त्राव पैदा होता है. और अंततः मस्तिक को भी खुशी मिलती है. यह महसूस करते हैं, कि हमारे पास अच्छा टैलेंट है. क्योंकि खेल एक समूह में खेला जाता है. इसीलिए यह दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धी करता है. और हार जीत की स्थिति पैदा करता है. हर किसी को जितने में बहुत बड़ा मजा आता है. हारने वाला जीतने के इरादे से खेल खेलता रहता है. और जितने वाले अधिक जीतने के इरादे से खेल खेलता जाता है. ऐसे करके पब्जी में सतत डूबे रहते हैं.
फक्त पबजी खलनायक नहीं हैं। अतीत में कई खेल इसे आये हुए हैं. जो मानस पर एक अलग प्रभाव डालते हैं और इससे बाहर निकलना बहुत कठिन है।

पब्जी के साइड इफेक्ट

हिंसक मानसिकता:

पब्जी गेम में हिंसा कराना मुख्य आधार है. हिंसा फैलाने के अलावा खेल में कुछ भी नहीं है. अगर खेल के खिलाड़ी का दिमाग नहीं होता है, तो उसकी मानसिकता भी हिंसक हो जाती है. अब जब बच्चा पढ़ाई करने के लिए घर पर बैठता है, तो वह अपना मोबाइल फोन लेकर खेलने चला जाता है. यहां तक कि अगर बच्चे इस खेल को नहीं खेलते हैं, तो बी किशोर के मन में सतत हिंसक प्रवृत्ति के ख्याल मगज में आते रहते हैं. कहने का मतलब यह है कि पब्जी खेल खेलने वाला बच्चा हिंसक मानसिकता वाला हो जाता है.
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सामाजिक सक्रियता

जब मोबाइल में गेम नहीं था, तब जितना समय परिवार, रिश्तेदारों, प्रिय जनों को दिया जाता था उतना समय अब क्या दिया जाता है ??? नहीं दिया जाता. अगर आप पब्जी गेम से फ्री हो तब परिवार और रिश्तेदारों को समय दे सको ना. पब्जी गेम से फ्री होते नहीं, और कुटुम को समय देते नहीं. इसका मतलब यह हुआ कि पब्जी गेम के कारण खिलाड़ी की सामाजिक सक्रियता कम हो जाती है....

मानसिक स्वस्थता

जैसा की शुरुआत में बताया गया है कि अकेलापन, निराशा, मानसिक परेशानी, कहीं भी मौज मस्ती नहीं करना, विगेरे पब्जी गेम के कारण होते हैं. सामाजिक संबंधों पर काम और शरीर पर इसका प्रभाव होता है. लेकिन किसी का ध्यान नहीं जाता है. इसके कारण कुछ लोग आत्महत्या भी कर लेते हैं. क्योंकि वह खेल के बिना नहीं रह सकते हैं. यही तो गेमर की परिपक्वता दिखाती है.

बच्चों का स्वास्थ

पब्जी गेम में मानसिक स्वास्थ दिखाई नहीं दे सकता है. लेकिन शारीरिक समस्याओं को लंबे समय तक छिपाया नहीं जा सकता है.
गर्दन के दर्द, पीठ दर्द, हाथ दर्द, उँगली, पैर का दर्द कलाई का दर्द, बैठने की स्थिति, चलना अन्य काम करते समय किसी से टकरा जाना का डर, जैसी अनेक समस्या के उदाहरण खोजने के लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं है. लगातार कंप्यूटर को देखने से भी ऐसी समस्याएं होती है. आंखों को नुकसान अलग है.
अनिद्रा का असर
पब्जी खेलने वाला देर रात तक सोते नहीं है. पब्जी खेलने वाला व्यक्ति अनिद्रा से पीड़ित होने लगता है, तो यह शरीर की आंतरिक घड़ी और फिर स्वास्थ्य को प्रभावित करता है. हमारा शरीर रात को सोने के लिए बनाया गया है. और ऐसा उल्टा परिवर्तन हमारे शरीर को प्रभावित करता है. समय व्यतीत करने वाले सभी को खेलने के लिए पब्जी की शुरुआत में कम घंटों की आवश्यकता होती है, और फिर दिन में 24 घंटे भी कम पड़ने लगते हैं. तो कुछ और करने का समय कहां होता है. उसके पास अंत में समय की बर्बादी से अधिक क्या हो सकता है.

बिल्कुल गलत लत

यह खेल अंततः एक लत में बदल जाता है. जेसे एक नशे वाली व्यक्ति को नशा का आदत हो जाता है वेसे ही पब्जी गेम भी एक नशे की तरह हो जाता है. लेकिन इतना तो तय है कि जैसे-जैसे खेल की आदत बढ़ जाती है वैसे वैसे दूसरे काम करने की उत्पादकता घट जाती है.
और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने लंबे समय से घोषित किया है. कि जुआ खेलने की आदत मानसिक बीमारी का एक लक्षण है जिससे लोगों को बचना जरूरी है. क्योंकि पब्जी गेम एक जुए की तरह ही है.

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